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🦟 मलेरिया जागरूकता

ओडिशा में मलेरिया के सबसे अधिक मामले भारत में दर्ज होते हैं। जल्दी पहचान और उपचार गंभीर जटिलताओं को रोक सकते हैं।

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मलेरिया क्या है?

मलेरिया एक गंभीर बुखार की बीमारी है, जो प्लाज़्मोडियम परजीवी के कारण होती है। ये परजीवी संक्रमित मादा एनोफ़ेलीज़ मच्छर के काटने से खून में प्रवेश करते हैं। शरीर में पहुँचकर ये पहले लीवर में और फिर लाल रक्त कोशिकाओं में पनपते हैं — जिससे बुखार, ठंड और थकान का चक्र बनता है। ओडिशा के बालेश्वर, मयूरभंज और कोरापुट जैसे जिले देश के सबसे अधिक मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में हैं, जहाँ जून से नवंबर के मानसून महीनों में मामले तेजी से बढ़ते हैं।

परजीवी प्रकार
P. falciparum (गंभीर) और P. vivax (सामान्य)
फैलाव
संक्रमित मच्छर का काटना (सामान्यतः शाम–सुबह)
उच्च जोखिम काल
जून से नवंबर (मानसून और उसके बाद)
उद्भवन अवधि
मच्छर काटने के 7–14 दिन बाद
🌡️

लक्षण पहचानें

  • 🌡️ तेज़ बुखार — अक्सर अचानक, 39–41°C तक
  • 🥶 बुखार से पहले ठंड लगना और कंपकंपी
  • 🤕 तेज़ सिरदर्द और शरीर दर्द
  • 🤢 मतली, उल्टी और भूख न लगना
  • 😓 बुखार उतरने के बाद अत्यधिक पसीना
  • 😴 अत्यधिक थकान और कमज़ोरी
  • 🩸 गंभीर मामलों में: पीलिया, गहरे रंग का मूत्र, दौरे — तुरंत अस्पताल जाएं
⚠️ स्वयं दवा न लें। मानसून में बुखार और ठंड लगने पर मलेरिया की जाँच अवश्य कराएं।
🛡️

बचाव के उपाय

  • 🪟 हर रात कीटनाशक-उपचारित मच्छरदानी के नीचे सोएं
  • 🚫 पानी जमा न होने दें — कूलर, बर्तन और टायर खाली करें
  • 👕 शाम और सुबह पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें
  • 🏠 खिड़की और दरवाज़ों पर जाली लगाएं
  • 🧴 शाम के समय मच्छर भगाने वाली क्रीम लगाएं
  • 🌿 आसपास की झाड़ियाँ और घास साफ रखें
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